Conway's Game of Life

Conway's Game of Life

कठिन

परिचय

कॉनवे का जीवन का खेल एक रोचक सेलुलर ऑटोमेटन है, जिसे 1970 में ब्रिटिश गणितज्ञ जॉन हॉर्टन कॉनवे ने बनाया था।

यह खेल कोशिकाओं के एक द्वि-आयामी ग्रिड से बना है। इनमें हर कोशिका या तो "जीवित" होती है या "मृत"।

हर पीढ़ी के बाद कोशिकाएँ नियमों के एक समूह के अनुसार अपने आठ पड़ोसियों के साथ परस्पर क्रिया करती हैं। यही नियम तय करते हैं कि अगली पीढ़ी कैसी बनेगी।

निर्देश

हर पीढ़ी के बाद हर सेल का उसके आठ पड़ोसी सेलों से संपर्क होता है। यानी वे सेल जो उससे आड़ी, खड़ी या तिरछी दिशा में सटे होते हैं।

हर सेल पर ये नियम लागू होते हैं:

  • जिस जीवित सेल के दो या तीन जीवित पड़ोसी हों, वह जीवित रहता है।
  • जिस मृत सेल के ठीक तीन जीवित पड़ोसी हों, वह जीवित सेल बन जाता है।
  • बाकी सभी सेल मर जाते हैं या मृत ही रहते हैं।

आपको 1 और 0 का एक मैट्रिक्स दिया गया है, जिसमें 1 जीवित सेल और 0 मृत सेल दर्शाता है। इस मैट्रिक्स में हर सेल पर ये नियम लागू कीजिए और अगली पीढ़ी लौटाइए।

इनपुट/आउटपुट प्रारूप

ग्रिड की हर पंक्ति को 64 बिट के एक पूर्णांक के रूप में दर्शाया जाता है।

उदाहरण के लिए,

    0 1 0
    1 0 0
    1 1 0

को इस रूप में दर्शाया जाता है

0b010
0b100
0b110

ग्रिड में अधिकतम 64 कॉलम होते हैं।


स्रोत

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